परिचय · गुरुजी की यात्रा

शब्दों से जीवन बदलने वाले गुरु

पं. विजय शंकर मेहता धर्म व अध्यात्म को जीवन-प्रबंधन से जोड़ने वाले प्रसिद्ध चिंतक व प्रेरक वक्ता हैं। उनका मूल संदेश सरल है — भीतर शांति होगी तो जीवन की हर राह सहज हो जाएगी।

पं. विजय शंकर मेहता

पं. विजय शंकर मेहता

Shantam Meditation Center · Ujjain

6,000+
प्रवचन
135+
विषय
20
देश
45+
पुस्तकें
जीवन-दर्शन

अध्यात्म से जीवन-प्रबंधन तक

पं. विजय शंकर मेहता का मानना है कि हमारे शास्त्र केवल पूजा-पद्धति नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला सिखाते हैं। श्रीमद्भागवत, रामायण और गीता में छिपे सूत्र आज के तनावभरे जीवन में भी उतने ही प्रासंगिक हैं।

2004 के कुंभ में गुरु-आशीर्वाद के पश्चात उन्होंने जीवन-प्रबंधन के प्रवचन को अपना ध्येय बनाया। तब से वे 135 से अधिक विषयों पर लगभग 20 देशों में छह हज़ार से अधिक प्रवचन दे चुके हैं। उनकी शैली सरल, सहज और व्यावहारिक है — कठिन दर्शन को रोज़मर्रा के उदाहरणों से समझाना उनकी विशेषता है।

दैनिक भास्कर में प्रकाशित उनका स्तंभ “जीने की राह” लाखों पाठकों के दिन की शुरुआत का हिस्सा है। उन्होंने जीवन-प्रबंधन व अध्यात्म पर पैंतालीस से अधिक पुस्तकें लिखी हैं।

यात्रा व ध्येय

एक सतत साधना-पथ

  1. शिक्षा व सेवा

    रसायन शास्त्र से बैंक तक

    रसायन शास्त्र में एम.एससी. के पश्चात स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में लगभग बीस वर्ष की सेवा — अनुशासन, निष्ठा व लोक-व्यवहार की गहन समझ का काल।

  2. दैनिक भास्कर

    पत्रकारिता में दो दशक

    दैनिक भास्कर समूह के साथ लगभग बीस वर्ष — ब्यूरो चीफ, संपादक एवं ब्यूरो सलाहकार के रूप में। इसी दौरान लोकप्रिय स्तंभ “जीने की राह” ने लाखों पाठकों को प्रेरित किया।

  3. कुंभ 2004

    जीवन का निर्णायक मोड़

    2004 के कुंभ में स्वामी सत्यमित्रानंद जी एवं माँ प्रेमापांडुरंग जी के आशीर्वाद से जीवन को नई दिशा मिली — अध्यात्म को जीवन-प्रबंधन से जोड़ने का संकल्प।

  4. 6,000+

    देश-विदेश में प्रवचन

    135 से अधिक विषयों पर लगभग 20 देशों में छह हज़ार से अधिक प्रवचन — भागवत, रामकथा, हनुमत कथा एवं जीवन-प्रबंधन पर सरल, प्रेरक शैली में।

  5. 45+

    पुस्तकों की रचना

    जीवन-प्रबंधन व अध्यात्म पर पैंतालीस से अधिक पुस्तकें — जिनमें “जीने की राह” व “कामयाब होना ही है” प्रमुख हैं।

  6. उज्जैन

    शांतम् मेडिटेशन सेंटर

    त्रिवेणी घाट, उज्जैन में साधना, ध्यान व सत्संग का केंद्र — भीतर की यात्रा का स्थल।

जीवन को समस्या की तरह मत जियो, साधना की तरह जियो। भीतर शांति होगी तो बाहर की हर राह आसान लगेगी।

पं. विजय शंकर मेहता

गुरुजी की लेखनी

प्रमुख पुस्तकें

जीने की राहकामयाब होना ही हैजीना सिखाती है रामकथापितामह भीष्मएक शाम परिवार के नाम

एवं जीवन-प्रबंधन व अध्यात्म पर पैंतालीस से अधिक पुस्तकें।

दर्शन

कुछ क्षण

पं. विजय शंकर मेहता
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पं. विजय शंकर मेहता
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