सुंदरकाण्ड की पहली पंक्ति का पहला शब्द — “शान्तम्”
जिन्हें शांति की तलाश, वह शान्तम् अवश्य आएं।
श्री हनुमान चालीसा से मेडिटेशन का विश्व का पहला केंद्र
शान्तम्
पवित्र क्षिप्रा नदी के तट पर, उज्जैन की आध्यात्मिक भूमि में बसता शान्तम् ध्यान केंद्र। श्री हनुमान चालीसा के माध्यम से ध्यान की कला सीखिए और स्वयं से एक कालातीत संबंध जोड़िए।


न मंदिर, न आश्रम — एक अलग ही स्थान
शान्तम् एक अनूठा स्थान है, जो पारंपरिक मंदिर और आश्रम — दोनों से भिन्न है। यहाँ का ध्यान हॉल भक्ति और शांति का सुंदर संगम है, जो रमणीय प्राकृतिक परिवेश में ध्यान और योग के अभ्यास के लिए बनाया गया है। पूर्णतः वातानुकूलित यह हॉल 200 साधकों के बैठने की क्षमता रखता है, और इसके मंच पर श्री हनुमानजी की विशेष प्रतिमा प्रतिष्ठित है।
इस हॉल में सामूहिक ध्यान सत्र होते हैं, जहाँ 200 साधक एक साथ 24 मिनट के हनुमान चालीसा ध्यान पाठ्यक्रम में सम्मिलित हो सकते हैं। इस हॉल की विशेषता यह है कि प्रवेश करते ही साधक ‘शून्यता’ की अवस्था में उतरने लगता है। प्राकृतिक सौंदर्य से घिरा और संलग्न गौशाला से जुड़ा यह हॉल सकारात्मक ऊर्जा से भरा रहता है।
शान्तम् में क्या-क्या
श्री हनुमान चालीसा से मेडिटेशन
24 मिनट का सामूहिक ध्यान पाठ्यक्रम — विश्व का पहला ऐसा केंद्र।
ध्यान के अतिरिक्त अन्य अनुष्ठान
शान्तम् में ध्यान पाठ्यक्रम के अलावा अन्य अनुष्ठान भी सम्पन्न होते हैं।
पाठ व आरती
नियमित पाठ और आरती — भक्ति और शांति का दैनिक क्रम।
गो ध्यान
गायों के सान्निध्य में, उनकी आँखों पर ध्यान केंद्रित कर सरलता और शांति से जुड़ाव।
गौशाला व गो ध्यान
शान्तम् की एक विशेषता है इसकी गौशाला। देश भर की सामान्य गौशालाओं से भिन्न, यहाँ एक अथवा अधिकतम सात गायें रहती हैं और वे ध्यान प्रक्रिया का अभिन्न अंग बनती हैं। साधक गायों के समीप बैठकर उनकी सकारात्मक ऊर्जा ग्रहण करते हैं और उनकी आँखों पर ध्यान केंद्रित करते हैं। गौशाला का यह पक्ष हनुमान चालीसा ध्यान पाठ्यक्रम में सम्मिलित है। इसका निर्माण और रूपरेखा एक खुले ध्यान केंद्र के रूप में की गई है — ‘गो ध्यान’ के माध्यम से व्यक्ति सरलता और शांति से जुड़ता है।


प्रशासनिक भवन
तीन मंजिलों में 3000 वर्ग फुट में फैला प्रशासनिक भवन शान्तम् का केंद्र-बिंदु है। अतिथि निवास के साथ-साथ इसमें गुरु निवास भी है — पंडित विजयशंकर मेहता का स्थायी निवास।
अन्नक्षेत्र
शान्तम् में अन्नक्षेत्र है — रसोई और भोजनशाला, जो ध्यान के अनुभव को और गहरा करती है। योग और ध्यान में भोजन की भूमिका को समझते हुए यहाँ शुद्धता और स्वच्छता पर विशेष बल है। रसोई लगभग 625 वर्ग फुट और भोजन हॉल लगभग 1000 वर्ग फुट में है। शान्तम् में भोजन करना एक ‘यज्ञ’ में सम्मिलित होने के समान है — पवित्रता से युक्त। यह भोजन आंतरिक शांति पाने में सहायक होता है। ध्यान पाठ्यक्रम के साधकों से अपेक्षा की जाती है कि वे प्रतिदिन कम से कम एक भोजन शान्तम् की भोजनशाला में करें, क्योंकि यह पाठ्यक्रम का अभिन्न अंग है।
इसके अतिरिक्त
शान्तम् के परिसर में एक मंदिर और यज्ञशाला भी सम्मिलित है।
शान्तम् की एक झलक












शान्तम् पधारें
शान्तम् ध्यान केंद्र, त्रिवेणी घाट शकरवासा, गोठड़ा, उज्जैन, मध्य प्रदेश – 456010